November 18, 2022

राजनैतिक इच्छा-शक्ति

धर्मान्तरण और गीता

------------©-------------

भारतवर्ष पर विदेशी शासन के समय से ही सनातन-धर्म को पूरी तरह से मिटा देने के लिए ईसाई, मुस्लिम, नास्तिक और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोग मिलजुलकर कार्यरत हैं। सर्वधर्म-सम-भाव की आड़ में अपने धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता का अधिकार भारत के संविधान द्वारा दिया गया है। किन्तु यह अधिकार अपने-आप में श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षा में स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन है और उससे अत्यन्त विपरीत है, जिसके अनुसार, अपना धर्म दूसरे किसी भी धर्म से निकृष्ट होने पर भी मनुष्य को अपने धर्म को त्यागकर अन्य धर्म को कदापि नहीं  स्वीकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि अपने धर्म का आचरण करते हुए हो जानेवाली मृत्यु भी अत्यन्त श्रेष्ठ है, जबकि परधर्म को स्वीकार कर, उस पर आचरण करना अत्यन्त भयावह है।

जब श्रीमद्भगवद्गीता में ही यह मार्गदर्शक सिद्धांत इतनी स्पष्टता से व्यक्त किया गया है तो इसे हमारे संविधान में एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में स्वीकार करने में क्या समस्या है।

यदि अपने धर्म का प्रचार करने के अधिकार को संविधान में ही निषिद्ध कर दिया जाए, तब भय या दबाव, लोभ आदि से भी धर्मान्तरण किए जाने प्रश्न ही पैदा नहीं होगा, क्योंकि तब किसी के लिए भी अपने धर्म को त्यागने का अधिकार ही नहीं होगा।

सन्दर्भ के लिए गीता के निम्नलिखित श्लोक द्रष्टव्य हैं :

अध्याय ३

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।।

स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।।३५।।

अध्याय १८

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।।

स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।।४७।।

यहाँ यह स्पष्ट किया जाना भी महत्वपूर्ण है कि गीता के अनुसार वर्णाश्रम व्यवस्था प्रकृति-प्रदत्त है और वर्ण का आधार मनुष्य के गुणों और उसके द्वारा किए जानेवाला कर्म से तय होता है, न कि जन्म या जाति, वंश या माता-पिता के आधार पर। इसलिए मनुष्य अपने वर्ण का चुनाव स्वयं ही तय कर सकता है। और उस आधार पर वह ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य अथवा शूद्र होता है, न कि केवल किसी वर्ण-विशेष में जन्म ले लेने से।

अध्याय ४

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।।

तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्।।१३।।

यदि हममें राजनीतिक इच्छा-शक्ति है तो, धर्मान्तरण को पूर्णतः एक अपराध और अवैध भी घोषित किया जा सकता है। और तब किसी को धर्मान्तरित किए जाने के कार्य को भी वैसा ही एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। 

***

No comments:

Post a Comment