Showing posts with label भोर सुहानी. Show all posts
Showing posts with label भोर सुहानी. Show all posts

May 06, 2022

पहेली जिन्दगी की

कविता / 06-05-2022

-------------©--------------

जिन्दगी की पहेली को बूझती है,

जब कविता, अचानक सूझती है,

ज़रूरी नहीं है, कि जीत ही जाए,

हार भी जाती है, लेकिन जूझती है।

कोई पत्थर हो, या पत्थर-दिल,

जिसे भी माने, दिल से पूजती है। 

भोर हो जाने से जरा पहले जैसे,

कोई चिड़िया अचानक कूजती है।

***



***


या


November 05, 2009

भोर सुहानी (बाल-कविता/गीत)

******************************************
******************************************

___________भोर सुहानी !!___________

_________( बाल - कविता / गीत) _____
भोर सुहानी !!
सू-ऊ-र-ज ऊगा !!
हुआ सवेरा,
चिड़ियों ने ,
छोड़ा बसेरा,
छेड़ा तराना,
चह-चह,चह-चह,चह-चह,चह-चह,
चह-चह,चह-चह,
-चह,चह-चह,
भोर सुहानी,
नई कहानी,
कहें-सुनाएँ,
नाचें गाएँ,
हिल-मिल,हिल-मिल,हिल-मिल-हिल-मिल,
-हिल-मिल,मिल-मिल,
खेलें-कूदें,
धूम मचाएँ,
-खिल-खिल, खिल-खिल,खिल-खिल,खिल-खिल,
किल-किल, किल-किल, किल-किल-किल-किल.
भोर सुहानी !!

****************************************************************************