क्या आपको पता है कि... !
आज से ठीक 5,000 वर्ष पहले भी आप इस स्थान पर आए थे?
जब उस भवन की ऊपरी मंजिल पर लिखे इस संदेश पर मेरी नजर पड़ी तो मैं चौंका। शायद बहुत से ऐसे भी लोग रहे होंगे जिन्होंने उस संदेश को पढ़ा होगा लेकिन उस पर ध्यान न दिया हो। उस समय किसी दूसरे महत्वपूर्ण काम से मैं वहाँ से जा रहा था इसलिए भी मेरे लिए वहाँ रुकना या पता लगाना मुश्किल ही था। जल्दी ही पता चल गया कि वह किसी तथाकथित धार्मिक / आध्यात्मिक संस्था -
"प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय"
का कार्यालय था। मेरे लिए इस सबका कोई महत्व नहीं था। उन्हीं दिनों मेरे एक परिचित से मेरी मुलाकात हुई। मुझे नहीं पता था कि वे "आनंद-मार्ग" नामक इसी तरह की दूसरी एक और संस्था से जुड़े थे। वे उम्र में मुझसे दस-बारह साल बड़े थे और मुझे भी उस संस्था की ओर जाने के लिए उत्साहित करने की कोशिश कर रहे थे। तब एक दिन मुझे "आनंद-मार्ग" के दफ्तर ले गए। वहाँ लंबे बाल और दाढ़ी मूँछों वाले लाल वस्त्रधारी एक दो व्यक्ति थे जिन्हें वे लोग "अवधूत" कह रहे थे। उनके पीछे की एक आलमारी में एक खोपड़ी जैसी कोई वस्तु दिखलाई दी। फिर वे रहस्यपूर्ण बातें करने लगे। श्मशान और साधना के बारे में। उस सबको देखकर मेरे मन में उस सबसे बहुत नफरत होने लगी। वहाँ से लौटने के बाद फिर कभी मैं उन परिचित से नहीं मिला। एक दो बार वे मेरे घर पर भी आए थे लेकिन मैंने न तो उनसे बात की, न उनकी ओर देखा भी। अपने पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई करता रहा। उस समय धर्म और अध्यात्म के बहाने ऐसे अनेक उपद्रव हो रहे थे। एक स्थान पर
"सत्य साईं बाबा"
के "चमत्कार" हो रहे थे, जहाँ पर हर गुरुवार को उनकी तस्वीरों से "भभूत" झरती रहती थी। इन सबसे मेरा मन बहुत क्षुब्ध हो चुका था और मैं बुरी तरह से उकता चुका था। और आजकल भी यू-ट्यब पर ऐसे हजारों वीडियो देखते हुए लगता है कि इस सबका क्या अंत है!
वैसे एक बात अवश्य कह सकता हूँ कि इस -
hindi-ka-blog
में यह मेरा आखरी पोस्ट है।
GOOD-BYE!
अलविदा!
👋
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