कविता / 09-05-2022
--------------©--------------
सोच पर बंदिश नहीं,
इजहार पर हो सकती है,
ख्वाब पर बंदिश नहीं,
दीदार पर हो सकती है,
रस्मो रिवाज़ की पाबंद,
इस दुनिया में,
दोस्ती-दुश्मनी पर हो न हो,
तक़रार पर हो सकती है!
***
कविता / 09-05-2022
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सोच पर बंदिश नहीं,
इजहार पर हो सकती है,
ख्वाब पर बंदिश नहीं,
दीदार पर हो सकती है,
रस्मो रिवाज़ की पाबंद,
इस दुनिया में,
दोस्ती-दुश्मनी पर हो न हो,
तक़रार पर हो सकती है!
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