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April 17, 2022

न लौटनेवाला समय

अपुनरावर्तनीय 

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इस अप्रैल माह में शायद शनि ग्रह के अतिरिक्त शेष सभी ग्रह राशि-परिवर्तन कर रहे हैं। कालसर्प योग जो पिछले सप्ताह था, इस सप्ताह भी कल तक रहेगा। यूक्रेन- रूस के बीच के युद्ध के सात सप्ताह बीत चुके हैं। यूक्रेन के लड़कों (लड़ाकों) ने रूस के एक बहुत बडे़ युद्धपोत 'मस्क्वा' को, जो अन्ध-महासागर (या ब्लैक सी) में तैनात था, जीते-जी सागर में इस तरह दफ़ना दिया है कि अब उसकी स्मृति ही शेष रह गई है। 

कल हनुमान-जयन्ती थी, जो आज भी मनाई जा रही है।

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमत्ता वरिष्ठं।।  

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

सूर्य से विद्युच्चुम्बकीय तूफ़ान धरती की दिशा में तेजी से चला आ रहा है, जिससे रेडियो और मोबाइल संचार ठप्प या अस्त-व्यस्त होने की संभावना है। 

सूर्य का कोरोना (मंडल) धरती पर  कोरोना रोग की तरह फैल रहा है और उसके नए-नए वैरियंट्स जीव वैज्ञानिकों को हैरान कर रहे हैं। ऋण पर आधारित आर्थिक उन्नति अनेक देशों को दिवालिया और तबाह कर चुकी है, -अभी भी कर रही है, और जिसके शिकार पाकिस्तान और नेपाल से श्रीलंका तक, तथा  अफ्रीका और दुनिया भर तक के भी अनेक देश हो रहे हैं। यदि रूस, यूरोप (नाटो), अमेरिका और चीन, अपने अपने अहंकार के मद में डूबे रहे तो और संसार को इससे और भी बड़ी किसी विपत्ति में धकेल सकते हैं। 

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November 15, 2021

जुग सहस्र योजन पर भानू

लील्यो ताहि मधुर फल जानू। 

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श्री हनुमान चालीसा में उपरोक्त वर्णन पाया जाता है ।

श्री हनुमान का जन्म रामायण में वर्णित किष्किंधा में हुआ, ऐसा मानकर चलें तो उदित होता हुआ सूर्य वहाँ से इस प्रकार दो सहस्र योजन की दूरी पर रहा होगा। यह दूरी भूमध्यरेखीय और मकररेखीय दूरियों के बीच की औसत दूरी कही जा सकती है।

रामायण के ही एक अन्य प्रसंग में यह वर्णन है कि जब भगवान राम ने राक्षस मारीची पर बाण चलाया तो उस बाण ने उसे वहाँ से एक सहस्र योजन की दूरी तक भारत के दक्षिण पूर्व की दिशा की ओर समुद्र पार तक फेंक दिया। संभवतः वही स्थान आज के समय का मॉरिशस हो सकता है। भारत से मॉरिशस के बीच की हवाई दूरी को यदि एक सहस्र योजन माना जाए, तो भारत से पूर्व में सूर्योदय की दिशा में अर्थात् भूमध्य रेखा तथा मकर रेखा के बीच कहीं वह स्थान भारत (किष्किन्धा) से दो सहस्र योजन हो सकता है।

इस प्रकार संभवतः हनुमान जी ने जब सूर्य की ओर उड़ान भरी होगी तो वे धरती की सतह के समानान्तर तल पर उड़ते हुए गतिशील रहे होंगे।

मकर रेखा पर यह दूरी सूर्य के उदय होने के और अस्त होने के बीच की दूरी है। और भारत से मॉरिशस के बीच की दूरी से यह दूरी दो गुना है। 

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