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August 11, 2015

आज की कविता / स्वतन्त्रता

आज की कविता / स्वतन्त्रता
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तुम प्यास हो तो मिट जाओ,
तुम प्यार हो तो बह जाओ,
जहाँ में रहना अगर मुश्किल हो,
साँस सी मुझमें तुम ठहर जाओ ।
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जिस प्रकार मनुष्य को जीने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, वैसे ही उसे स्वेच्छया अपने मर जाने के अधिकार से भी वंचित नहीं किया जाना चाहिए ।
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July 06, 2015

आज की कविता / विवेक

आज की कविता / विवेक
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(सन्दर्भ- इन्द्रधनु के रंग) 
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हिंस्र जीवों से भरा है अति गहन,
भोग का प्रवाह पर संकीर्ण है,
इस तरफ़ या उस तरफ़ तो बच सकेंगे,
मझधार में संभावना तो क्षीण है ।
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