©
1.
रास्ता, भविष्य का,
कहीं नहीं मुड़ता,
टूट जाएँ पंख तो,
पंछी नहीं उड़ता,
फूल जैसे सूख जाए,
शाख से टूटा हुआ,
लौटकर वह फिर कभी,
शाख से नहीं मिलता!
--
2.
लक्ष्य यद्यपि शुद्ध है,
पर रास्ता अवरुद्ध है,
चाहती है यदि नियति ही,
करना निरन्तर युद्ध है!
***
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1.
रास्ता, भविष्य का,
कहीं नहीं मुड़ता,
टूट जाएँ पंख तो,
पंछी नहीं उड़ता,
फूल जैसे सूख जाए,
शाख से टूटा हुआ,
लौटकर वह फिर कभी,
शाख से नहीं मिलता!
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2.
लक्ष्य यद्यपि शुद्ध है,
पर रास्ता अवरुद्ध है,
चाहती है यदि नियति ही,
करना निरन्तर युद्ध है!
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जॉइन किया तो चार पंक्तियाँ लिखीं :
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कोशिशें कर रहा हूँ जुड़ने की,
कोशिशें कर रहा हूँ उड़ने की,
ये भी मालूम है, बिछुड़ना है,
कर रहा हूँ तैयारी उजड़ने की!
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