September 26, 2017

दो कविताएँ १ ’कुछ भी!’ २. सारांश

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दो कविताएँ
१ ’कुछ भी!’
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इनी-हंसा* की कहानी चैनल,
नई फिर से बनाओ ना!
इनी-हंसा कौन थी / है,
फिर से सबको बताओ ना!
इन्हें हँसना है या रोना है,
शिकायत है या है तारीफ़,
ये दर्शक समझ नहीं पाते,
ज़रा तुम ही समझाओ ना!
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२. सारांश
हवाएँ बहा ले जाएँगीं पानी,
पानी बहा ले जाएँगे रेत,
रेत बहा ले जाएगी वे नाम,
जो लिखे थे हमने तुमने,
लौट जाएँगी लहरें लेकिन,
हवाओं को करने परेशान,
हवाएँ ढूँढती रहेंगी हमको,
उनमें जो मिट चुके हैं नाम !
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*हनी-इंसान

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