बढ़ती उम्र के साइड-इफेक्ट्स!
उधेड़बुन, बुन-उधेड़!
"और क्या चल रहा है, आपका स्वास्थ्य कैसा है?"
वे पूछते हैं।
क्योंकि कोई बात करने के लिए कुछ नहीं है।
और मैं इन औपचारिकताओं से ऊब चुका हूँ, असहज महसूस करने लगा हूँ। इस बीच यू-ट्यूब पर एक वीडियो देखते हुए इस पर ध्यान गया कि कैसे हमारा अचेतन मन हमारी तमाम बातें नोट और रेकॉर्ड किया करता है! फिर लगातार डेेडिकेेटेेडली डिक्टेट भी करने लगता है!
अब जैसे उन्हें उत्तर देते हुए जाने अनजाने ही अगर मैं कह दूँ -
"हाँ, कभी कभी बुखार जैसा लगता है.. तो वे पूछने लगते हैं -
"डॉक्टर को दिखाया?"
और उन्हें टालने के लिए मैं कुछ भी कह देता हूँ।
इसे भी अचेतन नोट और रेकॉर्ड भी कर लेता है, फिर किसी समय जब मैं अन्यमनस्क होता हूँ तब अचानक मेरा अचेतन जैसे गुरिल्ला युद्ध की शैली में मुझ पर वार कर देता है। अपनी पकड़ में लेकर कहता है -
"सुबह सुबह ठंडी हवा में घूमने जाने का नतीजा है यह! अपना ध्यान खुुद ही क्यों नहीं रखते?"
सुनकर मैं सहम जाता हूँ, कभी कभी और भी अधिक बेचैन और उद्विग्न भी। या बस उसकी उपेक्षा कर अपना ध्यान किसी दूसरी तरफ लगाने लगता हूँ। जैैसे ही मुझे यह याद आया, और इस पर ध्यान गया कि अपना ही (अचेतन) मन कैसे शरीर को समय समय पर सुझाव देता रहता है और फिर शरीर यंत्रवत उन सुझावों का बस आज्ञा के अनुसार पालन करने लगता है!
चेतन-अचेतन मन की इस पूरी गतिविधि पर नजर पड़ते ही मैं सतर्क हो गया! उनसे कहता हूँ - "अरे बढ़िया हूँ मैं!" अचेतन इसे भी सुन और नोट कर लेता है और तुरंत ही शरीर को यह संदेश दे देता है! मैं गुनगुनाने लगता हूँ!
Watch your own / the Mind!
THE SPLIT MIND.
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