हिन्दी कविता
विस्मृति-मुग्ध
--
It's nice, whatever it is!
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गंध भी मत छूना मन,
पहचान भी बनाना मत,
देख लेना सिर्फ छवि,
स्मृति में तुम बसाना मत!
फिर फिर मिलेगा वह तुम्हें,
जैसे मिला हो पहली बार,
सोचना, कहना भी मत,
यह था मेरा पहला प्यार!
***
हिन्दी कविता
विस्मृति-मुग्ध
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It's nice, whatever it is!
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गंध भी मत छूना मन,
पहचान भी बनाना मत,
देख लेना सिर्फ छवि,
स्मृति में तुम बसाना मत!
फिर फिर मिलेगा वह तुम्हें,
जैसे मिला हो पहली बार,
सोचना, कहना भी मत,
यह था मेरा पहला प्यार!
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