March 20, 2011

"......यह जो,...."


"......यह जो,...."

~~20032010~~

© Vinay Vaidya 


पेड़ 


यह जो हरा है !
देखकर आँखें शीतल हुईँ ,
और हृदय उमड़ा है !

आकाश

यह जो नीला है,
दूर तक फ़ैला है,
देखकर मन जुड़ा है,
पँख लगा उड़ा है !


धरती 


यह जो श्यामल है,
कितनी सलोनी है,
देखकर याद आई,
माँ की गोद !


नेह


यह जो अरूप है,
जैसे छाँव-धूप है,
देखकर अदेखा सा,
मेरा महबूब है !

सूरज


यह जो नारंगी है,
सुबह और शाम को,
देखकर लगता है,
रोज खेलता है होली ! 
_________________________
**************************

2 comments:

  1. पंचमेल सुंदर होली के रंग बिखरे हैं.

    ReplyDelete
  2. राहुलजी,
    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !!
    सादर,

    ReplyDelete