Hindi Poetry.
--
कभी भी नींद आती है,
कभी भी टूट जाती है,
कभी भी नींद आती है,
कभी भी उड़ भी जाती है,
कभी तो दुःख भी आता है,
कभी फिर लौट जाता है,
कभी खुशी भी आती है,
कभी फिर लौट जाती है,
कभी उम्मीद-नाउम्मीद,
आया जाया करते हैं,
कभी अफसोस, फिक्र या गम,
दिल पर छा जाया करते हैं!
नहीं मैं, नींद या दुःख भी,
नहीं खुशी हूँ, या गम भी,
नहीं हूँ फिक्र या अफसोस,
जो आते जाते रहते हैं,
कभी मैं सुखी, कभी मैं दुःखी,
कभी जागा, कभी सोया,
कभी भूखा, कभी प्यासा,
हँसा भी कभी, कभी रोया,
अगर हूँ मैं यह सब कुछ,
तो क्या हूँ, भीड़ एक मैं?
या हूँ, मैं बस खालीपन,
जो न आता, न जाता है,
बस खयाल ही आता है,
बस खयाल ही जाता है,
तो क्या हूँ, खयाल ही मैं?
या हूँ बस वह खालीपन,
जो न आता, न जाता है?
कभी भी नींद आती है,
कभी भी टूट जाती है,
कभी भी नींद आती है,
कभी भी उड़ भी जाती है,
क्या कभी मौत भी आएगी,
क्या फिर वह लौट जाएगी?
क्या जीवन भी जाएगा,
या फिर से लौट आएगा?
क्या मैं तब खो जाऊँगा,
खुद को खोया पाऊँगा!
तो क्या वह नया जनम होगा,
या मैं बस मिट जाऊँगा?
कभी भी सपने आते हैं,
मगर फिर लौट जाते हैं,
कभी भी सपने आते हैं,
मगर फिर भूल जाते हैं,
कभी भी नींद आती है,
कभी भी टूट जाती है!
***


