June 29, 2010

वाह वाह वह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह

~~वाह वाह  वाह वाह वाह वाह वाह ~~
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रोज के अपने नियत भ्रमण के लिए,
शाम को थककर मैं,
निकला घर से .
उमस और गर्मी से बेहाल !
पसीने से तर- बतर,
व्याकुल बाहर-भीतर,
उस मोड़ पर जैसे ही पहुँचा,
जहाँ अचानक सड़क एक खुली जगह में निकलती है, 
और दायें-बाएँ,
बहुत चौड़े रास्तों पर मुड़ जाती है,
वह दौड़ती हुई आकर मुझसे गले लग गयी .
मैंने भी बाँहें फैलाकर,
स्वागत किया उसका,
और एक मृदु आलिंगन में समेट लिया उसे .
उसके दाँए कंधे पर था मेरा बाँया हाथ,
और दाँया,
उसकी पीठ पर से होकर,
उसकी कमर के दाँए,
ज़रा ऊपर .
वह मेरी बेटी, बहन, माँ, 
प्रियतमा, या दोस्त भी हो सकती थी. 
मिनट भर के लिए मेरी आँखें मुंदी की मुंदी रह गयी,
वह सहलाती रही,
-मेरा बदन !
और जब तक साँस में साँस आई,
वह जा चुकी थी, अपना सुखद,
अमृत-स्पर्श देकर !
ले गयी मेरी क्लान्ति, व्याकुलता,
- और स्वेद भी  !
कौन थी वह ?
अरे भाई,
गलत मत समझो,
--वह थी शाम की प्यारी, चंचल ,....
-- 
--हवा !

!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

2 comments:

  1. वाह!! वाह!! वाह!

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  2. So far, I didn't believe in flying saucers.
    I believed these are u.f.o.s, 'unidentified flying objects'. But your visit cleared my false belief.

    Some day, may be, one may hope,shall meet an Alien also !
    Thanks, And Regards.

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