September 29, 2016

आज की कविता / बाल-लीला

आज की कविता
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बाल-लीला
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विषधर पयोधर पूतना के,
विष के कलश थे छलक रहे,
भुजदण्ड सर्पिल भुजंगों से,
मिलन के लिए मचल रहे ।
दृष्टि-शर विष-बुझे तीर,
श्याम-शिशु पर जब पड़े,
वात्सल्य की तरंग से,
विष-कलुष सारे धुल गए ।
श्याम के शिशु-स्पर्श से,
विष हुआ तत्क्षण अमिय,
पूतना की मुक्ति का,
उद्धार का बस यह रहस्य ।
हर नारी तब बनी गोपिका,
हर व्रज-ललना राधा हुई,
हर प्रीति ने पाया प्रियतम,
हर प्रेम तब हुआ पवित्र ।
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(देवास, 29-09-2016)

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