March 08, 2016

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

आज की कविता
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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 
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उसने कहा था :
अपने जीवन में कई बार ऐसा लगा कि औरत होना मेरा एक ज़ुर्म था... !
जवाब में ये दो पंक्तियाँ बन पड़ीं :
वह न तुम्हारा ज़ुर्म था कोई और न कोई मज़बूरी ।
वह केवल गहरी करुणा थी, जिससे तुम जनमी नारी!
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