निर्वासन, निष्क्रमण,
अभिनिष्क्रमण और
महाभिनिष्क्रमण ...
Extradition, Exodus, Exile, Liberation, Abandonment and Deliverance.
मार्च 2022 में स्पष्ट हो गया था कि यहाँ से जाना है।
"आप कहाँ जाने के बारे में सोच रहे हैं?"
-मित्र ने पूछा।
"मैं कहीं जाने के बारे में नहीं, सिर्फ इतना ही सोच रहा हूँ कि यहाँ से जाना है।"
-मैंने कहा।
उसके और मेरे सोचने में यही बुनियादी फर्क था। लोग अकसर, जब भी कहीं जाने के बारे में सोचते हैं तो उन्हें मालूम होता है कि उन्हें फिर लौटकर यहीं आना है। बस कभी कभी ही यह भी, कि वे यहाँ, इस स्थान को हमेशा के लिए छोड़ने के बारे में सोच रहे होते हैं। जैसे जब उस समय वे किराए के मकान में रहते हों और नया जॉब या व्यवसाय करने के लिए किसी दूसरी जगह शिफ्ट होना होता है। मेरी स्थिति में यह भी संभव न था क्योंकि मुझे यह तो पता था कि इस स्थान को छोड़ना है और दूसरी किसी जगह पर रहने के लिए जाना है, लेकिन न तो इस उम्र में मैं कोई नया जॉब करने के बारे में सोच सकता था और न ही कोई व्यवसाय करने के बारे में। और मेरा मित्र तो इस पहलू पर सोच तक नहीं सकता था। मुझसे सिर्फ सतही तौर पर पूछ रहा था। फिर उसी मित्र के माध्यम से कुछ दिनों, हफ्ते दस दिनों के लिए तात्कालिक रूप से कहीं रहने की व्यवस्था हो गई, और फिर मैं पुरानी जगह लौट आया। साल भर उसी जगह अनिश्चय, असमंजस तनाव और चिन्ता में वहीं बीता। इस बीच एक पुराने मित्र मिले और तय हुआ कि वे मेरे रहने की (तात्कालिक रूप से) स्थायी व्यवस्था कर देंगे। खुद उन्होंने भी इस बारे में शायद ही कभी सोचा था। वे खुद ही अस्थिर परिस्थिति और मनःस्थिति से ग्रस्त और पीड़ित थे। उनकी तरह मैं भी उनके साथ साल-डेढ़ साल भर तक ऐसी ही स्थिति में फँसा रहा। फिर ऐसा कुछ संयोग बना कि डेढ़ साल से यहाँ रहने लगा हूँ। अभी तो लग रहा है कि संभवतः लंबे समय तक या कि शायद पूरे जीवन भर ही यहीं रहना है। वैसे भी कहीं लौटने के लिए न कोई स्थान, कारण और न ही कोई संभावना ही दूर दूर तक नजर आ रही है।
शायद यही निर्वाण है!
इति मम निर्वाणोपनिषद्।।
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