August 15, 2017

ह - नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्न शब्दकोश

नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्न शब्दकोश
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हक़ (उचित, वाजिब, न्याय्य, अधिकार),
हक़ीक़त (सच्चाई, यथार्थ, तथ्य, रहस्य),
हक़ीक़तन (वास्तव में),
हक़ीक़ी (अपरिहार्य, सच्चा), [इश्क़ हक़ीकी -ईश्वरीय प्रेम (लौकिक प्रेम 'इश्क़े-मज़ाजी' की तुलना में)],
हक़ीर (गर्हित, तुच्छ),
हज़म (पचना, खा जाना),
हज़रत (महामहिम, महान),
हज़ार (संख्या १०००),[संस्कृत - स-ह-स्र],
हज़ारहा (हज़ारों), [सहस्रशः],
हज़ारा (जिसमें हज़ार’ बहुत से हिस्से हों),
हज़ारी (हज़ार से संबंधित),
हज़ारी-बाज़ारी (फ़ौजी और तिजारती -सैनिक और व्यापारी),
हफ़्ता (सप्ताह),
हमक़ौम (एक ही जाति / देश / स्थान / संस्कृति के),
हमख़ियाल (एक समान विचारधारा के),
हमज़बान (एक ही भाषा बोलनेवाले),
हमज़ाद (जुड़वाँ),
हमज़ात (एक ही क़िस्म के),
हम-ज़ुल्फ़ (साढ़ू),
हममज़हब (एक ही परंपरा के),
हमराज़ (एक-दूसरे के रहस्य जाननेवाले),
हमसफ़र (सहयात्री),
हर-फ़न-मौला,
हरगिज़ (कदापि, क़तई, बिलकुल -’नहीं’ के साथ प्रयुक्त होता है),
हरफ़ / हर्फ़ (वर्ण, -विशेष रूप से अरबी या फ़ारसी भाषा में लिखा जानेवाला),
हरफ़नमौला (हर-फ़न-मौला),
बहरफ़ (शब्दशः, अक्षरशः, जैसे का तैसा, यथावत्),
हर्फ़ (हरफ़),
हर्राफ़ (चतुर, तीक्ष्णबुद्धिवाला),
हलक़ (गला, कंठ),
हलक़ा (सीमित क्षेत्र, पटवारी, तहसीलदार का हलक़ा), [हलका -वज़न में कम],
हलफ़ (शपथ),
हलफ़नामा (शपथपत्र),
हलालख़ोर (जो विधिसम्मत अन्न का सेवन करता है),
हलालख़ोर (सफ़ाई कर्मचारी),
हाज़मा (पाचन),
हाज़िम (पाचक, पच जानेवाला),
हाज़िर (प्रस्तुत, उपस्थित),
हाज़िरजवाब,
हाज़िरी,
हाफ़िज़ (रक्षा करनेवाला, जिसे क़ुरान कंठस्थ है), [मुहाफ़िज़ -शरणार्थी, बही-ख़ाता रखनेवाला, महफ़ूज़ - सुरक्षित],
हिक़ारत (घृणा, नफ़रत),
हिफ़ाज़त (रक्षा, सुरक्षा),
हिफ़ाज़ती (सुरक्षा से संबंधित, रक्षात्मक),
हिमाक़त (मूर्खता, धृष्टता, उद्दंडता),
हीलाबाज़ (चालबाज़),
हुक़्क़ा,
हुक़्केबाज़,
हुक़्क़ा-पानी,
हुज़ूर (मालिक, मुख्य व्यक्ति या स्थान, हुज़ूर तहसील),
हुज़ूरी - (सेवा, ख़िदमत), [जी-हुज़ूरी (चापलूसी)],
हैज़ा (विषूचिका, कॉलेरा),
हैफ़ (खेद, अफ़्सोस),
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स - नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्न शब्दकोश

नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्न शब्दकोश
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स  
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सक़्क़ा (जल-सींचने का पात्र) [संस्कृत - सिच् > सेक, अभिसिच् > अभिषेक],
सख़्त (कठोर, ठोस, सशक्त) [संस्कृत -शक्त, शक्तिः, शक्ती - सख़्ती],
सख़्ती,
सज़ा (योग्य, लायक़, दण्ड), [संस्कृत - सज्, सज्ज, सज्जित],
सज़ायाफ़्ता, [संस्कृत - सज्जायाः आप्तो ,यः सज़ावार],
सदक़ा (दान, अर्पण, समर्पण), [सदक़े जाना],
सफ़र (यात्रा),
सफ़री (यात्रा, यात्रा से संबद्ध),
सफ़हा (किताब का पृष्ठ, पाना),
सफ़ा (साफ़, स्वच्छ),
सफ़ाया (निवारण, समाप्ति),
सफ़ाई,
सफ़ीर (दूत),
सफ़ेद,
सफ़ेदपोश,
सफ़ेदा (खड़िया मिट्टी, चूना),
सफ़ेदी.
सबक़ (पाठ),
सब्ज़ (हरा, ताज़ा),
सब्ज़बाग़ (दिखाना),
सब्ज़ा (हरापन, हरीतिमा, हरियाली) [उग आया है दरो-दीवार पर सब्ज़ा ग़ालिब],
सब्ज़ी (हरापन, हरीतिमा, हरियाली, पत्तीदार, तरकारी),
सब्ज़ी-फ़रोश,
सरग़ना (नायक, प्रमुख),
सर्दी-ज़ुकाम,
सर्फ़ (ख़र्च करना, होना),
सर्राफ़,
सर्राफ़ा,
सलीक़ा (रीति, विधि, तरीका, रूढ़ि, परिपाटी),
साक़ी (मदिरा का प्याला देनेवाला, प्रिय), [संस्कृत -साक्षी],
साज़ (वाद्ययन्त्र),
साज़-संगीत,
साज़ो-सामान,
साज़िंदा (वादक, संगीतकार),
साज़िश (षड्यंत्र),
साज़िशी,
साफ़ (स्वच्छ, स्पष्ट, सफ़ेद),
साफ़ी (सफ़ाई करने का कपड़ा),
साबिक़ (पूर्व, पहले),
साबक़ा (सुदीर्घ परिचय, व्यवहार),
सिफ़त (प्रकृति, गुण, स्वभाव, चरित्र, आदत),
सिफ़र (शून्य), न-कुछ,
सिफ़ारत (दूत से संबंधित, मध्यस्थता),
सिफ़ारत-ख़ाना (दूतावास),
सिफ़ारिश (अनुशंसा, किसी के पक्ष में किया जानेवाला अनुरोध),
सिफ़ारिशी,
सिर्फ़ (मात्र, केवल),
सीख़ (पतली तारनुमा डंडी) [सीख-कबाब],
सीख़चा (खिड़की में लगी छ्ड़ें),
सीख़िया (सीख़ पर बना / भुना),
सुख़न (भाषण, वक्तृता), [हमसुख़न -एक सी भाषा बोलनेवाले],
सुराग़ (संकेत),
सुर्ख़ (गहरा या चमकदार लाल),
सुर्ख़ी (लालिमा, लाली),
सूफ़ी (सूफ़ी इस्लामिक आचार-विचार),
सूराख़ (छिद्र, छेद),
सैक़ल (कल-पुर्ज़ों को सुधारना, स्वच्छ करना)
सैक़लगर,
सोख़्ता (सोखनेवाला काग़ज़), [स्याही-सोख़्ता],
सोफ़ता (उचित अवसर, फ़ुरसत, प्रासंगिक),
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August 14, 2017

श - नुक्‍ता चीं - अनुक्‍त चिह्न शब्दकोश

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श -- नुक्‍ता चीं - अनुक्‍त चिह्न शब्दकोश
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शख़्स, शख़स (व्यक्ति),
शख़्सियत (व्यक्तित्व),
शख़्सी (व्यक्तिगत, वैयक्तिक),
शग़ल (फ़ुरसत, समय बिताना, गतिविधि),
शग़ला, शग़ल,
शगूफ़ा (फूल की कली, छिड़ना, छेड़ना, शुरू होना) [शगूफ़ा खिलना, छोड़ना],
शफ़क़, शफ़क़त (सुबह-शाम को होनेवाली आकाश की लालिमा),
शफ़ा (चिकित्सा, इलाज, उपचार),
शफ़ाख़ाना (दवाख़ाना, अस्पताल),
शरीफ़ (सभ्य),
शरीफ़ा (सीताफल),
शर्क़ी (पूर्व दिशा का, [मशरिक़ -पूर्व दिश],
शाख़ (डाली, शाखा),
शिगाफ़ (दरार, टूटना, कटने से हुआ घाव),
शिग़ाल (सियार) [संस्कृत - श्रगाल],
शिगूफ़ा, शिगूफ़ा,
शीराज़ा (ग्रथन, पुस्तक की जिल्द बाँधना), [शीराज़ा खुलना, टूटना, बिखरना],
शुग़ल, शग़ल,
शेख़ (गणमान्य, विशिष्ट), [शेख़-चिल्ली - कल्पना-लोक में विचरनेवाला],
शेख़ी (झूठी शान), [शेख़ी जताना, हाँकना, मारना],
शेख़ीबाज़ - शेख़ी जतानेवाला,
शोख़ (प्रसन्न, ख़ुश, चंचल, सनकी, शैतान, अधीर, चमकीला -रंग),
शोख़ी (रूमानी मिज़ाज)
शौक़ (इच्छा, रुचि, पसन्द होना), [शौक़ रखना, शौक फ़रमाना],
शौक़िया (प्रेमपूर्ण, प्रेमवश, लगाव होने से),
शौक़ीन (रुचि रखनेवाला),
शौक़ीनी,
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ल, व, - नुक्ता चीं -अनुक्त चिह्न शब्दकोश

ल - नुक्ता चीं -अनुक्त  चिह्न शब्दकोश
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लक़दक़ (निराश, अर्थहीन),
लक़दक़ (प्रखर, तेजस्वी),
लक़लक़् (एक पक्षी),
लक़वा (पक्षाघात, लू या ठंड लग जाना),
लख़लख़ा (सुगंधित द्रव्यों का मिश्रण),
लख़्त (लख़्ते-जिगर, लख़्ते-दिल, अत्यन्त प्रिय),
लताफ़त (नज़ाकत, मृदुता, कोमलता, लावण्य),
लतीफ़ (सौम्य, मृदु),
लतीफ़ा (चुटकुला, हास्य पैदा करनेवाला),
लतीफ़ेबाज़ (मनोरंजक),
लफ़ज़ी (शाब्दिक),
लफ़्ज़ (शब्द), [अलफ़ाज़],
लफ़्फ़ाज़ (वाचाल),
लवाज़मा (साथ रखने की ज़रूरी चीज़ें),
लहज़ा (दृष्टि, नज़र, क्षण, प्रसंग), [लहजा -उच्चारण, ध्वनि, शैली],
लाहौल बिला क़ूवत (चिन्ता, असहमति, भय, रोष व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त किए जानेवाले शब्द),
लाज़िम (ज़रूरी, अपरिहार्य),
लाज़िमी (लाज़िम, ज़रूरी), [लाज़िमी तौर पर],
लिफ़ाफ़ा,
लिफ़ाफ़िया (दिखावटी, ऊपरी),
लिहाज़ (ध्यान, शिष्टचार, शालीनता, सम्मान),
लिहाज़ा (अतः, इसलिए),
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वक़अत (वज़न, बल, दबाव),
वक़ूफ़ (ज्ञान, समझ), [वाक़िफ़, बेवक़ूफ़, नवाक़िफ़, वक्फ़],
वक़्त (समय, घड़ी, प्रसंग, क्षण), [बवक़्त, बेवक़्त, वक़्त गुज़ारना],
वक़्फ़ (धर्मार्थ दान आदि),
वक्फ़ा (अवधि, अंतराल, दौरान),
वग़ैरह (इत्यादि),
वग़ैरा, वग़ैरह,
वज़न (भार), [वज़नी, वज़नदार],
वज़ा (स्वभाव, स्थिति, दशा),
वज़ारत (वज़ीर का कार्यालय, कार्यक्षेत्र या कार्य),
वज़ीफ़ा (छात्रवृत्ति),
वज़ीर (मन्त्री, अमात्य),
वज़ीरी,
वज़ू (प्रार्थना से पहले पानी से शरीर की शुद्धि करना -इस्लामी विधि),
वफ़ा (प्रेम, स्नेह, निष्ठा),
वफ़ाई (प्रेम),
वफ़ात (मृत्यु) [वफ़ात पाना -मरना],
वरक़ (पँखुड़ी, पत्ती, धातु की पतली पत्ती, सोने-चांदी का वरक़),
वरक़ा (आवरण-पृष्ठ, पुस्तक का),
वरग़लाना (उकसाना, बहकाना, फ़ुसलाना),
वाक़ई (वास्तव में, सचमुच),
वाक़फ़ियत (जानकारी, सूचना), [वक़ूफ़ -ज्ञान, समझ],
वाक़िफ़,
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August 13, 2017

आज की कविता : ’मैं’

आज की कविता : ’मैं’
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’मैं’ कभी भीड़ है,
’मैं’ कभी भेड़िया,
’मैं’ कभी भेड़ है,
’मैं’ कभी गड़रिया,
’मैं’ कभी नदिया है,
’मैं’ कभी है नैया,
’मैं’ कभी धारा भी,
’मैं’ किनारा भी कभी,
’मैं कभी एक भी,
’मैं’ कभी अनेक भी,
’मैं’ कभी बुरा भी,
’मैं’ कभी नेक भी!
’मैं’ कभी ’मैं’ है,
’मैं कभी ’तू’ है,
’मैं' कभी ’हम’ है,
’मैं' कभी आप भी!
’मैं’ से जुदा कोई,
दूसरा ’मैं’ कहाँ?
’मैं’ के सिवा कोई,
दूसरा ’मैं’ कहाँ?
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August 12, 2017

र -नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्नकोश

र -नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्नकोश
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र 
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रक़बा (क्षेत्र -भूमि का),
रक़म (राशि, द्रव्य, सोना-चांदी, प्रकार),
 रक़मी (तय राशि, चिन्हित),
रक़ीब (प्रतियोगी),
रक़्क़ासा (नर्तकी), [रक़्स -नृत्य],
रख़्श (प्रकाश या किरण),
रग़बत (इच्छा, रुझान, झुकाव),
रदीफ़ (शायरी में किसी पंक्ति के अंत में मिलते-जुलते उच्चारण वाला शब्द),
रफ़ल (राइफल),
रफ़ल (ऊनी शॉल),
रफ़ा (समाप्ति), रफ़ा-दफ़ा,
रफ़ू (कपड़े को रफ़ू करना),
रफ़्ता (क्रमशः) [रफ़्ता-रफ़्ता],
रफ़्तार (गति, वेग, चाल),
रमज़ान (महीना),
रमज़ानी (रमज़ान के महीने का),
राज़ (रहस्य),
राज़दार (विश्वस्त, भरोसेमंद),
राज़िक़ (संवर्धन करनेवाला, परमेश्वर),
राज़ी (संतुष्ट),
राज़ी (रहस्य),
रुख़ (चेहरा, गाल, दिशा, सामने),
रुख़सत (विदा),
रुख़सती (विदाई),
रेख़ती (फ़ारसी से भिन्न प्रकार की शैली की उर्दू शायरी),
-रेज़ (रंगरेज़),
रेज़गी (रेज़गारी, खुल्ले पैसे),
रेज़ा (टुकड़ा),    
रेख़ता (बिखरा हुआ, मिश्रित, मिला-जुला),
रोग़न (मक्खन),
रोग़न (राग-रोग़न),
रोज़ (प्रतिदिन),
रोज़नामा (डायरी),
रोज़नामचा (डायरी),
रोज़-बरोज़ (दिन-प्रतिदिन),
रोज़मर्रा (आए दिन, रोज़ ही),
रोज़गार (आजीविका),
रोज़गारी (कमाई, नौकरी),
रोज़ा (रमज़ान के महीने में रखा जानेवाला),
रोज़ाना (रोज़),
रोज़ी (रोज़ी-रोटी),
रौग़न (रोग़न),
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य -नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्नकोश

य -नुक्‍ता चीं -अनुक्‍त चिह्नकोश
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य 
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यक़ीन (निष्ठा, भरोसा),
यख़नी (पुलाव),
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Note :
इस अनुक्‍त चिह्नकोश में  संग्रहीत हिंदी-शब्दों के लिए सन्दर्भ की औपचारिकता तथा सरलता के लिए आधार-रूप में
The OXFORD HINDI-ENGLISH DICTIONARY (R.S.McGregor 1993),
ISBN 0-19-563846-8
1993 Edition, Thirteenth impression 2003
को लिया गया है । इसलिए शब्दों के प्रचलित रूप और यहाँ दिए गए प्रकार में अंतर होना संभव है।
इस सूचना को इसलिए भी दिया जा रहा है कि पाठक इन शब्दों को स्वयं भी वहाँ से देख सकता है और अपनी संतुष्टि कर सकता है ।
यहाँ यह कार्य शुद्धतः हिंदी की सेवा की भावना से किया गया है इसलिए जिन शब्दों को यहाँ उद्धृत, संशोधित किया गया है, संपादित किया गया है, उन के लिए किसी प्रकार से किसी का कोई बौद्धिक अधिकार (Intellectual Property Rights) है ऐसा मैं नहीं समझता । न ही मेरा ऐसा कोई बौद्धिक अधिकार (Intellectual Property Rights) है।
यह सूचना इसलिए भी दी जा रही है कि किन्हीं कारणों या परिस्थितियों से अगर मैं इसे पूरा न कर सकूँ तो जिसकी भी रुचि हो वह इसे अपने तरीके से पूरा कर सकता है।
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August 11, 2017

म - नुक्‍ता चीं -अनुक्त चिह्नकोश

- नुक्‍ता चीं -अनुक्त चिह्नकोश
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मंज़र (दृश्य),
मंज़ूर (स्वीकार),
मंज़ूरी,
मक़दूर (सामर्थ्य, शक्ति, साधन),
मक़बरा (हुमाँयू का मक़बरा),
मक़बूल (स्वीकृत, राज़ी),
मक़रूज़ (ऋणी, ऋण लेनेवाला),
मक़सद (इरादा, ध्येय),
मक़सूद (जो ध्येय है),
मक़सूम (बँटा हुआ, विभाजित) [ तक़सीम -विभाजन],
मक़ाम (मुक़ाम, पड़ाव),
मक़ामी,
मख़ज़न (कोठार, भंडारगृह) [ख़ज़ाना, संस्कृत -महाजन], बन्दूक की क़ारतूस,
मख़मल (मखमल -कपड़ा),
मख़मली,
मख़मसा (दैन्य, विपत्ति),
मख़मूर (उन्मत्त), [ख़मीर उठना -किण्वन् ],
मख़रूती (झुका हुआ, मुड़ा हुआ, लहर की आकृति वाला),
मख़लूक़ (जिसका सृजन किया गया),
मख़सूस (विशिष्ट, ख़ास),
मग़ज़ (मस्तिष्क, सार, गूदा, तत्व),
मग़ज़ी (हद तक का, मर्यादात्मक, दिमाग़ी, तात्विक),
मग़रिब (पस्चिम),
मग़रबी, नग़रिबी (पश्चिमी, पाश्चात्य),
मग़रूर (हठी, दुराग्रही, दंभी, ज़िद्दी),
मग़रूरी (हठ, गर्व),
मग़्ज़, मग़ज़,
मज़कूर (सूचना, उल्लेख) [ज़िक्र, ज़ाकिर],
मज़दूर (श्रमिक),
मज़दूरी (श्रम, पारिश्रमिक),
मज़बूत (दृढ़),
मज़बूती (दृढ़ता, सामर्थ्य),
मज़मून (विवरण, विषय, संक्षेप),
मज़म्मत (दोषारोपण, आलोचना, निंदा),
मज़र्रत (हानि, क्षति -पहुँचाना),
मज़लूम (शोषित, जिस पर अत्याचार हुआ), [ज़ुल्म, ज़ालिम],
मज़हब (संप्रदाय, आचार-विचार),
मज़हबी (आचार-विचार का तौर-तरीक़ा),
मज़ा (आस्वाद, आराम, आनंद, सुख-शान्ति),
मज़े से, मज़ेदार,
मज़ाक़ (परिहास, विनोद), [मज़ाक़ करना -विनोद करना, मज़ाक़ उड़ाना -उपहास करना, खिल्ली उड़ाना],
मज़ाक़िया (विनोदपूर्ण, हास्य),
मजाज़ी (वैध, स्वीकार्य, अनुमत),
मज़ार (मृतक को जहाँ दफ़नाया गया वह स्थान या वहाँ बनाया गया भवन),
मरग़ोला (अंगूठी या अंगूठी के आकार की कोई वस्तु),
मरज़ (मर्ज़, रोग, बीमारी),
मरज़ी (स्वीकृति, अनुमति), [रज़ा, राज़ी],
मरीज़ (रुग्ण, रोगी),
मर्ग़ (मैदान, पर्वत की तलहटी, घाटी) [गुलमर्ग़],
मर्ज़, मरज़,
मर्ज़बान (राज्य का उत्तराधिकारी, राजकुमार),
मशक़्कत (मेहनत, परिश्रम, कठिन श्रम, विपत्ति),
मशग़ूल (व्यस्त, संलग्न),
मशरिक़ (पूर्व दिशा),
मशरिक़ी (पूर्व दिशा से संबंधित),
मश्क़ (अभ्यास, यत्न, प्रतिलिपि),
मसख़रा (विदूषक, मज़ाक़िया),
मसख़री (मज़ाक़, ठिठौली),
मसरफ़ (उपयोग, इस्तेमाल),
मसरूफ़ (में व्यस्त),
मसरूफ़ियत (व्यस्तता),
महज़ (केवल, सिर्फ़),
महज़र (एकत्रित होने का स्थान, जनहित-याचिका),
महफ़िल (सभा, संगीत-नृत्य की सभा),
महफ़ूज़ (सुरक्षित, साबुत),
माक़ूल (उचित, समुचित, यथेष्ट, वाँछित > वाजिब),
माक़ूलियत (औचित्य),
माज़ूर (असहाय, निर्बल, क्षम्य),
माफ़ (क्षमा करना) [संस्कृत -माप],
माफ़िक़ (योग्य, समान, बराबर), [संस्कृत -मापिक],
माफ़ी (क्षमा), [मुआफ़, मुआफ़िक़, मौफ़ीक़],
मारफ़त (द्वारा, के माध्यम से, के ज़रिए),
मारूफ़ (ज्ञात, विख्यात, प्रसिद्ध),
माशूक़ (प्रिय, स्नेही, स्नेहिल) [इश्क़, आशिक़],
माशूक़ा (प्रिया, स्नेही, स्नेहिल),
माशूक़ाना (आकर्हण, सौन्दर्यपूर्ण),
मिक़दार (मात्रा),
मिक़नातीस (चुंबक),
मिज़राब (तारवाद्य बजाने का साधन, प्लेक्ट्रम),
मिज़ाज (मिलवट, मिश्रण, प्रकृति, स्वभाव, मन की स्थिति),
मिज़ाजी (सनकी, भावनात्मकता),
मिर्ज़ा, मिरज़ा,
मीज़ान (जोड़ की क्रिया, कुल, नापना),
मुंतज़िम (व्यवस्थित, सुचारु), [ तंज़ीम, इन्तज़ाम],
मुंतज़िर (प्रतीक्षा करनेवाला), [इन्तज़ार],
मुअज़्ज़न (मुअज़्ज़िन), [अज़ान -आव्हान, आवाहन, आजान],
मुअज़्ज़िज़ (आदरणीय, प्रख्यात),
मुआफ़, माफ़
 मुआफ़िक़, माफ़िक़,
 मुआवज़ा (क्षतिपूर्ति, ऐवज़ी),
मुक़त्तर (आसवित, डिस्टिल्ड), [अवतर > इतर > इत्र > अत्तार > मुक़त्तर],
मुक़त्ता (क़रीने से कटा हुआ), [लॉन, दाढ़ी-मूँछ, काग़ज़],
मुक़दमा (अदालती पेशी, विवाद),
मुक़द्दम (प्रमुख, ऊंचा),[क़द],
मुक़द्दमा, मुक़दमा,
मुक़द्दर (भाग्य),
मुक़द्दस (पवित्र),
मुक़र्रर (तय),
मुक़ाबला (स्पर्धा),
मुक़ाबिल (टक्कर का),
मुक़ाबिला, मुक़ाबला,
मुक़ाम (ठौर, स्थान),
मुक़ामी (स्थान का, स्थायी),
मुख़तलिफ़, मुख़्तलिफ़ (भिन्न-भिन्न),
मुख़्तसर (प्रमुख, ख़ास),
मुख़्तार (मुख्य), [ख़ुद-मुख़्तार, ख़ुद-मुख़्तारी -स्वायत्तता],
मुख़बिर (गुप्तचर सूचना देनेवाला),
मुख़ातिब (सामना करना, सामने होना),
मुख़ालिफ़ (विपरीत, सम्मुख, विरोध में),
मुख़ालिफ़त (विरोध, विपक्ष),
मुख़्तलिफ़ (भिन्न-भिन्न),
मुग़ल, मुग़ली, मुग़लई, मुग़लानी, मुग़लिया,
मुज़ायक़ा (मुश्किल, परिणाम),
मुज़ाहिम (रोकनेवाला, बाधक),
मुतफ़न्नी (चालबाज़, चालाक),
मुतलक़ (अबाध, पूर्ण),
मुतअल्लिक़ (से संबंधित),
मुताबिक़ (अनुसार),
मुत्तफ़िक़ (तालमेल होना),
मुदाख़लत (दख़लंदाज़ी, हस्तक्षेप),
मुनक़्क़ा,
मुनाफ़ा (लाभ),
मुफ़लिस (निर्धन, कंगाल),
मुफ़लिसी,
मुफ़स्सल (अलग हुए, अलग-अलग),
मुफ़ीद (फ़ायदेमंद, लाभप्रद),
मुफ़्त (बिना मूल्य लिए),
मुफ़्ती,
मुमताज़ (प्रसिद्ध),
मुरग़ा, मुर्ग़ा,
मुरग़ी, मुर्ग़ी,
मुर्ग़ (मुर्ग़ा),
मुलाक़ात ( मिलाना,भेंट),
मुलाक़ाती,
मुलाज़मत (सेवा, उपस्थिति),
मुलाज़मी,
मुलाज़िम (कर्मचारी),
मुलाहज़ा (जाँच),
मुवाफ़िक़, मुआफ़िक,
मुशफ़िक़ (प्रिय, स्नेही, दयालु),
मुश्ताक़ (इच्छुक, चाहनेवाला),
मुसाफ़िर (यात्री),
मुसतौफ़ी (हिसाब का ऑडिट),
मोम-ज़ामा (कपड़ा),
मौक़ा (अवसर),
मौक़ूफ़ (निलंबित, निर्भर),
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August 10, 2017

’आज’ की कविता / इन दिनों

’आज’ की कविता
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इन दिनों 
सुबह सरे-राह* पर पर्दा था,
एक साया था सायात** का,
सवाल था दिन भर, कि क्या है,
शाम को पर्दा फ़ाश हो गया,
यूँ तो पर्दे पे हर रोज़ ही,
नित नये मंज़र नज़र आते हैं,
आँखें चौकन्नी अगर हों,
छिपे ख़ंज़र नज़र आते हैं,
जैसे बनते हुए महलों में,
ठीक से देखोगे अगर,
बस देखनेवालों ही को
ढहते खंडहर नज़र आते हैं,
जैसे खुशहाली तरक़्की में,
दस्तके-क़हर नज़र आते हैं,
मय के छलकते प्यालों में,
ख़ामोश ज़हर नज़र आते हैं,
जैसे उनके आने की अदा,
आते ही कहते हैं कि जाते हैं,
और जाने की फिर ये अदा,
जाते हुए कहते हैं कि आते हैं,
बस कि यूँ पर्दे उठा करते हैं,
बस कि यूँ पर्दे गिरा करते हैं,
सिलसिला रहता है तारी,
सिलसिले यूँ ही जारी रहते हैं ।
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*sararah
**sayat
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August 09, 2017

सृजन : कविता, संगीत, चित्र

संगीत, चित्र और कविता (गीत)
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यह वीडिओ एपिसोड १६ से मैंने सुना । वाचक ने जैसा कि कवि ग्रेस के बारे में कहा कि हो सकता है कवि ने स्वयं भी कविता को उस प्रकार से न समझा हो, जैसा किसी और ने समझा होगा ।
कविता, चित्र और संगीत (ख़ासकर भारतीय शास्त्रीय संगीत) के बारे में मेरी समझ यह है कि आप इन्हें किसी पैमाने पर इनके मूल तत्वों को नाप नहीं सकते । किंतु फिर भी आप संवेदना के स्तर पर उस मनःस्थिति से अवश्य जुड़ सकते हैं जिसमें रचना का सृजन किया / हुआ होता है । और ज़रूरी नहीं कि रचना किन्हीं भावनाओं को जागृत या उद्दीप्त करे ही (हालाँकि वह भी संभव है, और प्रायः होता भी है), बहरहाल यह अवश्य संभव है कि रचना आपको एक ऐसे लोक में ले जाए जहाँ आपका मन अत्यंत शान्त, स्तब्ध और स्थिर हो जाता है, संक्षेप में कहें कि स्वाभाविक रूप से ’एकाग्र’ हो जाता है, जहाँ आपके मन की गतिविधि (चित्तवृत्ति) अनायास निरुद्ध हो जाती है ।
और इसके लिए कविता, संगीत या चित्र की एक विधा भी पर्याप्त समर्थ हो सकती है । मेरा सोचना तो यह है कि एक से अधिक विधाओं में संयोजित रचना का अपना सामर्थ्य श्रोता / दर्शक / की रुचि और परिपक्वता के अनुसार कम या अधिक भी हो जाता है ।
मराठी कवि ’ग्रेस’ की रचना के आस्वाद में मैंने यही पाया ।
मैंने कुछ समय पूर्व RSTV का you-tube का एक लिंक शेयर किया था,  जिसमें भारतीय फ़िल्मोद्योग के पर्दे के पीछे संगीत के रचनाकारों की ’कला’ के बारे में बतलाया गया था । उसमें एक संगीतकार भारतीय संगीत को ’लीनियर’ कह रहे थे, और उस की तुलना में पाश्चात्य विधा को (लेटरल) / स्पेटिअल् ! उनका आशय यह था कि भारतीय विधा में एक ही वाद्य प्रमुख होता है जिसके साथ एक राग के स्वरों की संगति का (जैसे तानपूरा या सारंगी) और एक तालवाद्य होता है । जबकि पाश्चात्य (या आधुनिक) में अनेक वाद्यों (उदाहरण के लिए एक से अधिक वायोलिन एक साथ) से स्वरों  के संयोजन से नया प्रभाव पैदा किया जाता है । यह हुआ (लेटरल) / ’स्पेटिअल्’ । एक अन्य महिला संगीतकार ने भी इस बारे में लगभग यही कहा था ।
मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या संगीत की उस (लेटरल) / ’स्पेटिअल्’ विधा से चित्त की वह स्थिति होना संभव है जो ’ग्रेस’ की रचना पढ़ते हुए या सुनते हुए अनायास हो जाती है? संभव है कि एट्थ / नाइन्थ सिम्फ़नी को सुनने का अनुभव किसी गहन अनुभूति में ले जाता हो, किंतु मूल प्रश्न है राग की स्वाभाविक गति से उत्पन्न अनुभव । निश्चित ही भारतीय संगीत में स्वर (और वर्ण) देवता तत्व है, -अर्थात् ’जागृत-प्राण तत्व’ और उन्हें यन्त्रों से नहीं जगाया जा सकता ।
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